Tag Archives: भेदभाव

फिल्म चर्चा

29 Apr

पिछले  बार के मटरगश्ती शुरू हुयी इस इंतज़ार में की लाइट कब आये और हम फिल्म देख पाये. और वही हुआ . लाइट आई और हम सब अपनी पहली फिल्म देखने के लिए बैठ गये. पॉपकॉर्न से भरे  बर्तन यहाँ से वहा जा रहे थे . पर सब की नजरे परदे पर थी.

Chini Walks हमारी पहली फिल्म थी हु केन स्पीक ऑफ़ मैन, जो एक डाक्यूमेंट्री फिल्म है  यह फिल्म अम्बरीन अल्क़दर की है I फिल्म के तीन किरदार दिल्ली के जामिया नगर से थे I  तीनो ने ही अपने जिंदगी में कई सारे जेंडर से जुड़े नियम तोड़े थे और यह फिल्म उनके रोजमर्रा के इन्ही पहलू पर थी. तीनो के जिंदगी के कई सारे ऐसे पल थे जहाँ  उनको काफी संघर्ष करना पड़ता था, जैसे स्कूल के यूनिफार्म में क्या पहेनना है, दोस्त कौन होंगे और सबसे महत्वपूर्ण संघर्ष था, उनके पेह्चान. फिल्म के दो किरदार ने तो साफ़ कह दिया था की वे खुद को लड़के  की तरह देखते थे. 

 
इसके  बाद दूसरी फिल्म थी पुच्च्नी फॉर बिगिनर्स” नामक एक अंग्रेजी फिल्म थी और एक लड़की के जिंदगी के बारे में थी  
 
फिल्म ख़तम होने के बाद कुछ  समय की चर्चा हुई. ख़ास कर पहली फिल्म के बारे मे एक दोस्त का कहना था की उन्हें  अपने स्कूल की  यूनिफार्म पहेने में  दिक्कत आई. एक दोस्त ने कहा की शिक्षा और जेंडर से जुड़े नियमो से इन  लोगो के जिंदगी के साथ जुडाव को देखना बहुत जरुरी है क्योंकि एक इंसान स्कूल में काफी समय बिताता  है, और स्कूल में जब भेद  भाव होता है,तो कई सारे ट्रांसजेंडर बच्चे स्कूल छोड़ देते है. किसी ने कहा की उनके लिए शिक्षा जरुरी थी  इसलिए वो स्कूल नहीं छोड़ना चाहते थे. परन्तु किसी का कहना था की किसी किसी के लिए जेंडर पहचान बहुत जरुरी होती  है. और इसलिए स्कूल में अगर स्कर्ट पहन कर जाना पड़ता था, और उसपर सभी लोग ये कह के छेडते थे की लड़का हैं या लड़की.
हम  जेंडर, जेंडर ट्रांसग्रेस्सन और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर और चर्चा करना चाहते हैं, आपको क्या लगता हैं?
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कमिंग आउट: कितना ज़रूरी? कितना महत्वपूर्ण?

5 Apr

इस बार की कश्ती की मटरगश्ती में हम सभी दोस्त मिलें और शुरुवात हुयी चाय के प्यालो के साथ | दोस्तों के साथ खुले आसमान के नीचे चाय, समोसों और चिप्स का कुछ अलग ही मज़ा है | चाय की चुस्कियों के साथ शुरुवात हुई हमारे इस बार के मटरगश्ती विषय के ऊपर – जो की था कमिंग आउट (coming out) | अपनी कहानियाँ शुरू करने से पहले हमें लगा की उन्हे बांठने के साथ-साथ हमें कमिंग आउट के मायने और उससे जुड़े कईं पहलू पर सोच विचार करना चाहिए |

चर्चा के दौरान एक सहेली ने बताया की कई बार कॉर्पोरेट दफ्तरों में  लड़कियों के पहनावे और  चाल ढाल के तरीके से पता चल जाता है वो लोग “अलग” है | उनको अपनी मम्मी के सामने कामे आउट करना जरुरी था क्योंकि उनकी मम्मी उनके लिया बहुत मायने रखती है और वो अपनी जिंदगी की कोई भी बात अपने मम्मी से छुपा नहीं सकती | उनका कहना था की उन्होंने  अपने दोस्तों के सामने पहले कॉम आउट किया जिससे न की उनको समर्थन मिला बल्कि उनके मम्मी को भी उन्हें समझने में आसानी रहे.

उसी बात में आगे जोड़ते हुये एक अन्य दोस्त ने कहा की उनके लिए माता-पिता के सामने कम आउट करना ज्यादा आसान था क्योंकि वह उन्हें समझते है और उनका साथ भी देते है | लेकिन कभी-कभी उनसे शादी के बारे में पूँछ लेते है यह सोच कर के की कहीं उनका विचार तो नहीं बदल गया | शायद यह सोचकर की उन्हें आगे चलकर अकेलेपन की कोई दिक्कत न हो | उन्होंने बताया की वो एक विद्यार्थी है और दुसरे कई समूह से जुड़े हुये है |उनकी क्लास में उनके साथ देने वाले भी है और कुछ उनका मजाक उड़ाने वाले भी |  लेकिन उस से उनको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता |

एक और सहेली ने बताया की वह एक पंजाबी परिवार से है और आउट है | लेकिन परिवार वालों का ज्यादा समर्थन नहीं है | कई बार गुस्से में आकर कोई उन्हें ताने भी मार देता है, पर वह अपने कुछ करीबी दोस्तों से दिल की बात कर सकती है | कमिंग आउट की प्रक्रिया और परिणाम हर किसी के लिए अलग होते है | जहाँ कई दोस्त आपको स्वीकार करते है वहां कुछ दोस्त आपका साथ भी छोड़ जाते है  |

एक अन्य दोस्त का कहना की वह एक ऐसे परिवार से है, जहा नियम कानून और परिवार की नाक ऊँची रखना ही सबसे बड़ा धर्म है | ऐसा परिवार जहाँ लड़कियों की 21 साल की उम्र में शादी कर दी जाती है | इस सन्दर्भ में हमारे दोस्त घरवालों को अपनी समलैंगिकता के बारे में कोई एहसास भी नहीं दिलाना चाहते | लेकिन अपनी पहचान व्यक्त करने की प्रक्रिया में हमारे दोस्त ने बचपन से हमेशा लड़कों वाले कपडे ही पहने, जिसके वजह से कई बार घर वालों से काफी कुछ सुनना भी पड़ा |  अब वह एक कॉर्पोरेट दफ्तर में काम करते है जहाँ उन्होंने खुद से कुछ नहीं कहाँ लेकिन उनके पहनावे और तौर तरीको से लोगों के मन में काफी सवाल उठते रहते है |

जहाँ कई दोस्तों ने अपनाया वहां कुछ ने भेद-भाव किया । एक सहेली ने बताया की जब उहोने अपने दोस्तों से अपनी बाईसेक्शुअल और किंकी होने की बात व्यक्त करीं तो उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा |

इसके बाद तो हम ज्यादा बात नहीं कर पाए क्योंकि लोगो को जाना था, लेकिन हमारे सामने कई सवाल उभर कर आये | सबसे पहले की कमिंग आउट होता क्या है? क्या कमिंग आउट हर एल.जी.बी.टी.आई.क्यू व्यक्ति के लिए अनिवार्य और महत्वपूर्ण है? अगर हाँ – तो किसके लिए – अपने माता-पिता? दोस्त? रिश्तेदार? आप जहाँ काम करते है? या फिर अपनी खुद की समझ, पहचान और स्वीकृति के लिए | कमिंग आउट में आपकी ज़िन्दगी और सामाज का सन्दर्भ कितना मायने रखता है?

आप कमिंग आउट के बारें क्या सोचते है?