Sarvajanik Vahan aur hum! (Public transport and Us!)

5 Jul

लकड़ी  की  खूबसूरत मेज के चारों तरफ जमे हुवे लोगों से शुरू हुयी 23 ताफिख की मटरगश्ती।   इस बार हमने मटरगश्ती अलग अलग तरह के चर्चाओं के लिए  खोला, जिसका पहला विषय था, “सार्वजनिक वाहन” (public transport), जहाँ हमको अच्छे और बुरे – दोनों के  अनुभव  बांटने थे।

बड़े ही दिलचस्प बातें हुयी इस बारे में। किसी ने कहा की वो मेट्रो से कही जा रही थी, तो उसने एक लड़की को देखा जिसका विवरण कुछ इस तरह था- छोटी स्कर्ट पहनी हुयी थी, पेरो में बूट्स  public transportऔर उसके हाथ में एक अजीब सी किताब I परन्तु  उस लड़की के हाथ पर एक मजेदार टैटू(Tattoo) बना हुवा था- एक कंकाल के सर का तस्वीर था, उसके होठ पर काली रंग की लिपिस्तिक थी, जिससे खून कि  छोटी छोटी बूँदें खूबसूरती से गिर रही थी। टैटू (tattoo) देख कर हमारे दोस्त कुछ बोलने लायक नहीं रह गए थे। वो सिर्फ उस टैटू को ही देखते रहे और वो लड़की एक स्टेशन पर उतर गयी।
इसके बाद किसी और ने कहा की एक दिन मेट्रो में उन्होंने दो लड़कियों को देखा। वे दो लड़की एक दुसरे की प्रेमिका लग रही थी।  एक सीट पर बैठी हुयी थी, और दूसरी उसके सामने चिपक कर खड़ी हुई थी।  फिर क्या,  वे एक दुसरे को चूमने(kiss) लगे। आस पास बैठे लोग इधर उधर देखने लगे. एक महिला तो वह से उठ कर चली गयी। हमारे इस साथी का कहना था की उसे बहुत मजा आया और उसने घर पर जाकर अपने माँ से भी कह दिया इस घटना के बारे मे। उसकी माँ ने बस यही पुछा, “क्या सच्ची में ऐसा होता हे” I  खैर यह सुनकर अच्छा लगा हम सबको। शायद यह जोड़ा विषमलैंगिक (heterosexual) होता तो इतनी घबराहट नहीं होति। पता नहीं!
एक और हमारे साथी ने यह कहा की उनका बाल छोटा है, और वो  कभी कभी ‘लड़कों ‘ के तरह भी रहते  है. एक दिन वो मेट्रो में लेडीज कम्पार्टमेंट में चली गयी। इसको देखकर एक औरत उसके पास आई और पुछा की वो लड़का है या लड़का। यह बात सुन ते ही हमारी साथी ने अपना शर्ट ऊपर कर दिया।  इस को देख कर वोह औरत उसके पास से चली गई। वाह कितनी अच्छी तरह से बिना बोले उन्होंने जवाब दे दिया।
कुछ लोगो के अनुभव् सार्वजनिक वाहनों में ख़राब भी रहे। जैसे किसी का कहना था की एक बार एक बस में वो जा रही थी। बस में बहुत भीड़ थी। लोग एक दुसरे के साथ चिपक कर खड़े थे। थोड़ा दूर बाद उसने अपने कपड़े  में चिपचिपाहत महसूस किया और उनको पता चला की किसी आदमी ने उसके स्कर्ट के पीछे अपना लिंग से हस्त मैथुन (masturbation) किया था।
किसी एक साथी का कहना था की उन्हें कोई भी सार्वजनिक वाहन इस्तेमाल  करना पसंद नहीं है।  क्योंकि उनके कपड़े  और हाव भाव के कारण वहां इतना मानसिक उत्पीडन होता है। लोगो के सवाल और नजरे उनको बहुत डरावने लगते हैं।  फिर जांच करने वाली महिला गार्ड भी अजीब तरीके से छूती हैं। इसलिए उन्होंने सार्वजनिक वाहन  इस्तेमाल करना छोड़ हो दिया।
यह थे कुछ अनुभव लोगो के। ऐसे शायद बहुत अनुभव आप लोगो के भी होंगे। परन्तु यह जरुर सच्चाई हैं की अगर आप दुसरे लोगो से अलग दीखते हो, तो आपके साथ हिंसा या भेद-भाव होती है। यह इसलिए की समाज को एक ही तरह के लोग देखना पसंद हैं। जैसे अगर आप लड़के के शारीर में हो तो लड़का जैसे रहो, और अगर आप लड़कियों के शारीर में हो तो लडकियों जैसे रहो। यह सिर्फ जेंडर के नियमो तक सिमित नहीं हैं। यह यौनिकता के नियमो में भी दिखाई देती हैं। अगर आप लड़का हैं, तो लड़की से प्यार करो और अगर आप लड़की हे तो लडको से! वाह क्या कानून के समाज का! और इस से हट कर जीने वालो की तो कैर नहीं।
परन्तु ऐसा भी नहीं की हम हर वक़्त पीड़ित (victim) बनकर ही जीते हैं। हम अपना जगह भी बनाते हैं। मस्ती भी करते हैं, दोस्त बनाते हैं और अपनी जिंदगी का फैसला भी लेते हैं। हाँ यह कैसे भूल सकते हैं, मेट्रो पर नैन भी लड़ाते हैं। हैं न मजेदार हमारी जिंदगी। आपको कुछ बांटना हैं हमसे ? तो रुके क्यों हैं, चलिए बातिएँ अपने अनुभव सार्वजनिक वाहनों के!
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